बांग्लादेश की हालिया राजनीतिक उथल-पुथल और चुनावों के बाद बनी स्थिति भारत के लिए जितनी चुनौतीपूर्ण है, उतनी ही कूटनीतिक अवसरों से भरी भी है। विशेष रूप से तारीक रहमान के नेतृत्व में BNP की जीत और जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतों का सत्ता से निर्णायक दूरी बनाए रखना (हालांकि उन्होंने सीटें जीती हैं) भारत के लिए राहत की बात है।

भारत चीन के प्रभाव को काउंटर करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रहा है:
1. राजनीतिक विविधीकरण (Political Diversification)
भारत ने अब अपनी रणनीति “एक दल (अवामी लीग)” से बदलकर “देश के साथ संबंध” पर केंद्रित कर दी है।
- BNP के साथ जुड़ाव: प्रधानमंत्री मोदी ने तारीक रहमान को जीत की बधाई देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई किसी भी सरकार के साथ काम करने को तैयार है।
- विश्वास बहाली: अवामी लीग के साथ दशकों पुरानी निकटता के कारण उपजे “एंटी-इंडिया सेंटिमेंट” को कम करने के लिए भारत अब संतुलित और समावेशी कूटनीति अपना रहा है।
2. चीन के ‘आर्थिक जाल’ का मुकाबला
चीन ने हाल ही में बांग्लादेश में भारी निवेश ($30 बिलियन से अधिक) किया है और वहां ड्रोन फैक्ट्री जैसे रक्षा सौदे भी किए हैं। भारत इसे निम्न प्रकार से काउंटर कर रहा है:
- कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत अपने उत्तर-पूर्वी राज्यों (Northeast) को बांग्लादेश के चटगांव और मोंगला बंदरगाहों से जोड़ने वाली परियोजनाओं को गति दे रहा है। यह आर्थिक निर्भरता चीन के मुकाबले अधिक प्राकृतिक और टिकाऊ है।
- ऊर्जा और व्यापार: बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत बिजली ग्रिड और पाइपलाइन परियोजनाओं के जरिए अपनी उपयोगिता बनाए रख रहा है।
3. सुरक्षा और सीमा प्रबंधन
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता पूर्वोत्तर में उग्रवाद और अवैध घुसपैठ की वापसी है।
- आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस: भारत नई सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपेक्षा कर रहा है कि बांग्लादेशी धरती का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न हो।
- अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले भारत के लिए एक “नॉन-नेगोशिएबल” मुद्दा है। भारत अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय मंचों पर इस पर दबाव बनाए हुए है।
4. पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को रोकना
हाल के महीनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ी नजदीकी (जैसे सीधे समुद्री मार्ग की शुरुआत) भारत के लिए चिंता का विषय है।
- सार्क (SAARC) का पुनरुद्धार: बांग्लादेश पुरानी क्षेत्रीय सहयोग संस्थाओं को पुनर्जीवित करना चाहता है। भारत इसमें अपनी भूमिका को इस तरह देख रहा है कि वह पाकिस्तान को अलग-थलग रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखे।
निष्कर्ष: भारत के सामने मुख्य चुनौतियां
- शेख हसीना का प्रत्यर्पण: BNP सरकार शेख हसीना की वापसी की मांग कर रही है, जो भारत के लिए एक बड़ा ‘डिप्लोमैटिक सिरदर्द’ है।
- संतुलन: बांग्लादेश “Friends to all, malice to none” की नीति पर चलते हुए चीन और भारत दोनों से फायदा लेना चाहेगा।
क्या आप चाहते हैं कि मैं बांग्लादेश में चीन द्वारा किए गए हालिया निवेशों और उनके सामरिक महत्व पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करूँ?

मैं ब्रजेश कुमार कनेक्ट न्यूज मैं मुख्य संपादक पद पर हूं । किसी भी समस्या/मुझसे बात करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर संपर्क करें। जिससे लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
Tele/WhatsApp: +919313366662/+919412826856 e-mail: brajesh.business1919@gmail.com / info@connectnews.in



