शहीद जगदेव प्रसाद द्वारा निर्मित शोषित इंकलाब – शोषित इंकलाबबादी बिचारधारा के ही बल पर व्यवस्था परिवर्तन होगा , इनके अलाबा अन्य कोई भी सही और सार्थक बिकल्प शेष नहीं हैं : क्रन्तिकारी गौरव सिंह
( आज के मौजूदा कट्टर लुटेरा वादी जनतांत्रिक भारत में 99% राष्ट्रीय – क्षत्रिय – पंजीकृत राज़नैतिक दल – इनके प्रमुख , नेता गणतंत्र के इन 76 बर्षों में सिर्फ़ और सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ते रहे हैं और आज भी लड़ रहे हैं . लेकिन मूल समस्याओं का समाधान सिर्फ़ और सिर्फ़ व्यवस्था परिवर्तन ही हैं . जागरूक समाज़ दल जसद )

भारत में शोषित इंकलाब के लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद की शहादत के इन 51 बर्षों में 90% कमेरा वर्ग की पिछडी – अतिपिछडी , दलित – अतिदलित , आदिवासी – अल्पसंख्यक , पासमांदा मुस्लिम के रूप में चीथड़ों में विभाजित एवं सामाजिक – शैक्षणिक , सांस्कृतिक – आर्थिक , राज़नैतिक दृष्टि से गणतंत्र के इन 76 बर्षों में हाशिये पर धकेल दी गयीं 70% सर्वाधिक शोषित – बंचित , उपेक्षित – उत्पीड़ित , तिरष्कारित – अपमानित जातियों और इंसानों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लोकतान्त्रिक अवसर और अधिकार दिलाकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने के संकल्प के साथ भारत में हजारों छद्मम समता – समानता , अम्बेडकर – बहुजन , समाज़ – सामाजिक न्याय , लोकतंत्र – लोकहितबादी राज़नैतिक दलों का निर्माण हुआ हैं . जिनमें से बहुत से राज़नैतिक दल ऐसे हैं . जिन्होंने उत्तर प्रदेश – बिहार , झारखण्ड प्रदेश में कई कई बार सत्ता पर काबिज़ होकर सत्ता सुख भोगा हैं . उदहारण के लिए उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा की चार चार बार सरकारें रही हैं . उसके बाद भी क्या समाज़बाद ने सेंपई परिवार की लक्ष्मण रेखा पार की हैं ? . बसपा का बहुजन बाद सिर्फ़ और सिर्फ़ बसपा प्रमुख मायावती को चक्रवर्ती सम्राट प्रमाणित करने और माया के परिवार को सर्वसुख – सर्वसम्पन्नता के अलाबा सिर्फ़ और सिर्फ़ जाटव जाति बिशेष की 90% श्रमजीवी जातियों और इंसानों की मौजूदा तस्वीर और तकदीर बदल सका हैं ? . इसका जबाब होगा . नहीं….. बिलकुल नहीं . तो इसका मूल कारण हैं . सदियों पूर्व मात्र 10% लुटेरा वर्ग के कट्टर ब्राह्मण – पूँजी – सामन्त बादियों के हितों – अवसरों और अधिकारों को सर्वोपरि रखकर निर्मित कट्टर ब्राह्मण – सामन्तबादी साम्राज्य और व्यवस्था हैं . जिसके खिलाफ़ सम्पूर्ण भारत में शोषित इंकलाब के लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद के अलाबा अन्य किसी भी राज़नैतिक दल – इनके प्रमुख , नेता ने आंदोलन नहीं किया हैं . उक्त बिचार जागरूक समाज़ दल जसद के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रन्तिकारी गौरव सिंह ने शहीद जगदेव प्रसाद द्वारा निर्मित शोषित समाज़ दल शोसद के 54 वें स्थापना दिबस पर दैनिक भाष्कर के साथ एक बिशेष भेंटवार्ता के दौरान व्यक्त किये हैं .
शोषित इंकलाब के लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद एवं अर्जक महामना रामस्वरूप वर्मा द्वारा 7 अगस्त 1972 को शोषित समाज़ दल का निर्माण व्यवस्था परिवर्तन को प्रमुख लक्ष्य निर्धारित करके किया गया था . क्योंकि सत्ता पर काबिज़ केंद्र या प्रदेशों की सरकारें चाहे कितनी भी लोककल्याणकारी नीतियों – कार्यक्रमों और कानूनों को बना लें लेकिन धरातल पर उतारने और लागू करने की पूर्ण जिम्मेदारी सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रशासन की होती हैं . जबकि प्रशासन में नब्बे स्थान प्रति सैकड़ा पर कट्टर ब्राह्मण – सामन्तबादी ही बैठे हैं . वो पूर्ण समर्पण – ईमानदारी के साथ लागू ही नहीं करेंगे .
इसी को ध्यान में रखकर शहीद जगदेव प्रसाद ने 90% कमेरा वर्ग की शोषित – बंचित जातियों और इंसानों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नब्बे स्थान प्रति सैकड़ा सुनिश्चित भागेदारी देने की आवाज़ बुलंद की हैं . ज़ब तक व्यवस्था परिवर्तन के लिए प्रधानी से लेकर राज़धानी तक आर पार की निर्णायक जंग नहीं लड़ी जायेगी . तब तक 90% ” कमेरों के द्वारा ! कमेरों के लिए !! कमेरों का राज़ !!! ” स्थापित नहीं होगा . गणतंत्र के 76 बर्षों बाद भी 99% राज़नैतिक दलों – इनके प्रमुखों – नेताओं द्वारा सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ना 90% कमेरा वर्ग की 70% सर्वाधिक शोषित – बंचित जातियों और इंसानों के साथ सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा जालफरेब – दोगलापन , गद्दारी – विश्वासघात नहीं तो फिर और क्या हैं ? .
दैनिक भाष्कर द्वारा किये गये बेहद तार्किक सबालों का बेबाकी और निर्भीकता के साथ जबाब देते हुये कहा हैं कि अभी तो जागरूक समाज़ दल जसद उत्तर प्रदेश – मध्य प्रदेश , बिहार – झारखण्ड , राज़स्थान – उत्तराखण्ड के कई जिलों में 90% कमेरा वर्ग की 70% सर्वाधिक शोषित – बंचित , उपेक्षित – उत्पीड़ित , तिरष्कारित – अपमानित जातियों और इंसानों को जसद की बिचारधारा के बल पर जागृति करके उनके अन्दर स्वतंत्र – स्वाभिमानी – स्वयंचेता की चेतना – चरित्र – आचरण पैदा करके प्रधानी से लेकर राज़धानी तक निर्भीक – निष्पक्ष – निष्कलंक नेटवर्क – नेतत्व खड़ा कर रहा हैं . 70% शोषित – बंचित जातियों – इंसानों और बिशेषरूप से युवापीढ़ी को प्रशिक्षित करके उनके अन्दर अपने जन्मसिद्ध बाज़िब लोकतान्त्रिक हक़ – हकूक – हकूमत के लिए 10% लुटेरा वर्ग के कट्टर ब्राह्मण – पूँजी – सामन्तबादी हुक्मरानों के खिलाफ़ निर्णायक जंग लड़ने का अवरण जोश – जज्बा – जनून पैदा कर रहा हैं . ताकि ये किसी भी राज़नैतिक दल के अन्दर रहें. लेकिन अपने बाज़िब लोकतान्त्रिक हक़ – हकूक और हकूमत के लिए अपनी आवाज़ अटूट शब्दों में बुलंद आवाज़ में उठाते रहें .
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