जागरूक समाज दल (जसद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बहुजन और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर साधे निशाने; आगामी 2027 चुनाव के लिए नए राजनीतिक विकल्प को बताया अपरिहार्य।
नई दिल्ली:
जागरूक समाज दल (जसद) के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी गौरव सिंह ने दैनिक अमर उजाला के साथ एक विशेष साक्षात्कार में सामाजिक न्याय, बहुजन राजनीति और देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज के शोषित और वंचित वर्गों को सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में पूर्ण स्वतंत्रता, समानता और न्याय नहीं मिलता, तब तक वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है। इसके लिए उन्होंने सामाजिक जनक्रांति को अपनी पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
क्रांतिकारी गौरव सिंह ने कहा कि शोषित इंकलाब के प्रेरणास्रोत शहीद जगदेव प्रसाद की शहादत के पिछले पांच दशकों में देश के भीतर अनेक राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और पंजीकृत राजनीतिक दलों का उदय हुआ। इन दलों ने सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार, आंबेडकरवादी विचारधारा और लोकतंत्र का झंडा तो बुलंद किया, लेकिन 90 प्रतिशत श्रमजीवी (कमेरा) वर्ग, पिछड़ों, अति-पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और पासमांदा मुस्लिम समाज के जीवन में कोई वास्तविक बदलाव नहीं लाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राजनीतिक घरानों और उनके नेताओं ने शोषित समाज को केवल अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए विभाजित रखा, जबकि उन्हें वैज्ञानिक सोच, आंबेडकरवादी चेतना और जगदेव प्रसाद के क्रांतिकारी सिद्धांतों से दूर रखा गया।

विशेष बातचीत के दौरान जसद प्रमुख ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठन और उसकी भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने दावा किया कि महात्मा बुद्ध के मानवतावादी दर्शन और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का सहारा लेकर बनी यह पार्टी बहुजन समाज को वैचारिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ करने में विफल रही। गौरव सिंह के अनुसार, क्षेत्रीय व बहुजन राजनीति के नाम पर उभरी सपा, बसपा, राजद, जेडीयू, लोजपा, रालोद और अपना दल जैसे संगठनों में स्पष्ट विचारधारा, पारदर्शी नीतियों और कार्यक्रमों का अभाव है। ये संगठन केवल कतिपय घरानों, वंशों और निहित स्वार्थों से संचालित हो रहे हैं। शोषित और वंचित वर्ग आज भी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर है और मजबूत विकल्प के अभाव में इन दलों को समर्थन देने के लिए बाध्य होता रहा है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आगामी 2027 विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए क्रांतिकारी गौरव सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है जब शोषित समाज को एक सही, निष्पक्ष और सार्थक राजनीतिक विकल्प दिया जाए। इसके लिए एक संयुक्त वंचित जनतांत्रिक मोर्चा या सशक्त विकल्प का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जागरूक समाज दल (जसद) 90 प्रतिशत कमेरा वर्ग और 70 प्रतिशत सर्वाधिक वंचित आबादी को जनसंख्या के अनुपात में सत्तर प्रतिशत सीधी हिस्सेदारी दिलाने के संकल्प के साथ राजनीति में सक्रिय है। जसद की संगठनात्मक नीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में व्यक्तिवाद, पूंजीवाद और अवसरवादिता के लिए कोई स्थान नहीं है; केवल सिद्धांतों और विचारधारा को सर्वोपरि मानकर ही कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का चयन किया जाता है।
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